डॉ. एस उण्णिकृष्णन नायर


Director
डॉ. एस उण्णिकृष्णन नायर, विशिष्ट वैज्ञानिक ने फरवरी,2022 में निदेशक,वीएसएससी के रूप में कार्यभार ग्रहण किया। वे आइआइएसटी, तिरुवनंतपुरम के निदेशक भी थे। वे मानव अंतरिक्ष उड़ान केंद्र,बेंगलूरु के संस्थापक निदेशक हैं। उन्होंने केरल विश्वविद्यालय से यांत्रिक इंजीनियरी में बीटेक, आईआईएससी,बेंगलूरु से वांतरिक्ष इंजीनियरी में एमई और आईआईटी (एम),चेन्नई से यांत्रिक इंजीनियरी में पीएचडी प्राप्त की है। उन्होंने एनएएलएसएआर, हैदराबाद से दूरसंचार और अंतरिक्ष कानून में एमए की उपाधि भी हासिल की है। उन्होंने वर्ष 1985 में विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र (वीएसएससी), तिरुवनंतपुरम में अपने कैरियर की शुरुआत की और पीएसएलवी, जीएसएलवी और एलवीएम3 के लिए विविध वांतरिक्ष प्रणालियों और तंत्रों के विकास में शामिल रहे।

उन्होंने प्रथम कक्षीय पुनः प्रवेश प्रयोग, अंतरिक्ष संवाहिका पुन:प्राप्ति प्रयोग(एसआरई) में, अध्ययन चरण से लेकर वर्ष 2007 में उस अभियान की पूर्ति तक, एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने देश में पहली बार पुनः प्रवेश करनेवाले यान के लिए पैराशूट और अन्य पुन:प्राप्ति प्रणालियां विकसित करने में अत्यंत प्रभावशाली योगदान दिए हैं। उन्होंने सागर से एसआरई की पुन:प्राप्ति के लिए पुन:प्राप्ति प्रक्रियाओं और कार्यान्वयन को तैयार करने के लिए सेना सहित विविध राष्ट्रीय अभिकरणों को एकसाथ मिलाने में भी निर्णायक भूमिका निभाई है।

वे वर्ष 2004 से ही मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम के अध्ययन चरण से जुड़े रहे और परियोजना-पूर्व प्रौद्योगिकी विकास गतिविधियों के लिए परियोजना निदेशक थे। उन्होंने यान संरूपण, प्रणाली इंजीनियरी को परिभाषित करने और परियोजना-पूर्व गतिविधियों को शुरू करने के लिए विविध महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी विकास क्षेत्रों की पहचान करने हेतु परियोजना दल का नेतृत्व किया। वे केयर (क्रू मॉड्यूल एटमॉस्फेरिक री-एन्ट्री एक्सपेरिमेंट) के प्रदायभार निदेशक थे, जहां दिसंबर, 2014 में आयोजित एलवीएम3एक्स-केयर उप-कक्षीय अभियान में एक पूर्ण पैमाने का कर्मीदल मॉड्यूल सफलतापूर्वक उड़ान भरा था। उन्होंने मानव अंतरिक्ष उड़ान प्रौद्योगिकी विकास के साथ-साथ वीएसएससी की संरचना एन्टिटि के उप निदेशक के रूप में भी कार्य किया।

कर्मीदल बचाव प्रणाली,जो किसी भी आकस्मिकता के तहत समानव अभियानों में कर्मीदल के बचाव के लिए एक महत्वपूर्ण प्रणाली है, को परिभाषित करने में उन्होंने महत्वपूर्ण योगदान दिया है और जुलाई, 2018 में आयोजित प्रथम कर्मीदल बचाव प्रणाली–मंच विफलन परीक्षण के लिए अभियान निदेशक थे। उन्होंने उन्नत अंतरिक्ष परिवहन प्रणाली के कार्यक्रम निदेशक के रूप में कार्य किया, जो मानव अंतरिक्ष उड़ान, पुनरुपयोगी प्रमोचन यान, वायु श्वसन नोदन और उन्नत परीक्षण यान की विविध प्रौद्योगिकी विकास गतिविधियों को समाकलित करने हेतु सृजित एक एकीकृत एन्टिटि है।

इसरो का सबसे नया केंद्र, मानव अंतरिक्ष उड़ान केंद्र (एचएसएफसी) के संस्थापक निदेशक के रूप में, उन्होंने गगनयान परियोजना के दल का नेतृत्व किया और बेंगलूरु में एचएसएफसी में अंतरिक्षयात्री प्रशिक्षण केंद्र की स्थापना की।

उन्हें एसआरई हेतु दिए गए महत्तवपूर्ण योगदानों के लिए इसरो टीम उत्कृष्टता पुरस्कार, वर्ष 2014 में केयर के लिए टीम लीडर के रूप में इसरो उत्कृष्टता पुरस्कार, समानव अंतरिक्ष अभियान के लिए प्रौद्योगिकी विकास में उनके योगदानों के लिए वर्ष 2014 का इसरो व्यक्तिगत योग्यता पुरस्कार, वर्ष 2018 में कर्मीदल बचाव प्रणाली के मंच विफलन परीक्षण के लिए टीम लीडर के रूप में इसरो उत्कृष्टता पुरस्कार, वर्ष 2022 में इंडियन सोसाइटी ऑफ एनलिटिकल सायन्स से आत्मनिर्भरता पुरस्कार और वर्ष 2022 में ही सिस्टम्स सोसाइटी ऑफ इंडिया से राष्ट्रीय प्रणाली स्वर्ण पदक प्राप्त हुए हैं।

वे कई पेशेवर निकायों के सदस्य हैं और इंडियन नेशनल सोसाइटी फॉर एयरोस्पेस एंड रिलेटेड मैकेनिज़म (आइएनएसएआरएम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। उन्होंने कई शोध पत्र लिखे हैं, जिनमें 12 अंतरराष्ट्रीय पत्रिकाओं/सम्मेलनों के लिए हैं। वे एक पेटेन्ट रखते हैं और मानव अंतरिक्ष उड़ान गतिविधियों को दिए गए योगदानों के लिए उन्हें मानद डॉक्टरेट भी प्राप्त हुआ है।

वे परिमित तत्व विश्लेषण पर एक पाठ्य पुस्तक के सह-संपादक हैं। वे उत्कटप्र कृति प्रेमी हैं और उसके संरक्षण के लिए काम करते हैं। उन्होंने प्रमुख मलयालम पत्रिकाओं में कुछ लघु कहानियां भी प्रकाशित की हैं|