हमारे अध्यक्ष

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डॉ. के शिवन ने वर्ष 1980 में मद्रास प्रौद्योगिकी संस्थान से वैमानिकी इंजीनियरी में स्नातक की उपाधि प्राप्त की। वर्ष 1982 में उन्होंने आइआइएससी, बैंगलूर से वांतरिक्ष इंजीनियरी में एमई की उपाधि प्राप्त की। बाद में वर्ष 2006 में आइआइटी, मुंबई से वांतरिक्ष इंजीनियरी में अपना पीएचडी पूरा किया।

वर्ष 1982 में उन्होंने इसरो की पीएसएलवी परियोजना में कार्यभार ग्रहण किया तथा संपूर्ण अभियान योजना, अभियान अभिकल्पना, अभियान समाकलन और विश्लेषण में बड़ा योगदान दिया।

इसरो में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने ग्रुप निदेशक, अभियान अनुकरण एवं संश्लेषण ग्रुप, परियोजना निदेशक, आरएलवी-टीडी, उप निदेशक, एयरो तथा संरचनाएं तथा मुख्य नियंत्रक, वीएसएससी जैसी अनेक जिम्मेदारियां निभाई।जुलाई 2014 से मई 2015 तक वे निदेशक, एलपीएससी तथा जून 2015 से जनवरी 2018 तक निदेशक, वीएसएससी रहे। उन्होंने सचिव, अंतरिक्ष विभाग तथा अध्यक्ष, अंतरिक्ष आयोग का कार्यभार जनवरी 15, 2018 को ग्रहण किया।

पीएसएलवी के एक ही अभियान में 104 उपग्रहों के प्रमोचन (पीएसएलवी सी37) के मुख्य अभियान शिल्पी वे थे। परियोजना निदेशक, जीएसएलवी के रूप में, जीएसएलवी की दो लगातार दो असफलताओं के कारण, समग्र अभिकल्पना पुनर्निर्माण का उन्होंने नेतृत्व किया। अभिकल्पना संबंधी समस्याओं का समाधान करके प्रमोचन यान को प्रचालनात्मक किया गया। स्वदेशी क्रायो चरण के का उड़ान परीक्षण भी इसमें शामिल था। जीएसएलवी ने दक्षिण एशिया उपग्रह का सफल प्रमोचन किया और अप्रैल 2018 में होने वाले चंद्रयान ।। मिशन के लिए इसे निर्धारित किया गया है। भारत की मिट्टी से सबसे भारी उपग्रह का प्रमोचन करनेवाली जीएसएलवी मार्क।।। की प्रथम विकास उड़ान की सफल पूर्ति उनके नायकत्व के अधीन थी। भविष्य की अपेक्षाओं की पूर्ति तथा चरणबद्ध तरीके से वर्तमान क्षमताओं के संवर्धन हेतु इसरो के अंतरिक्ष परिवहन तथा प्रौद्योगिकी रोडमैप के मुख्य शिल्पी वे हैं थे। उन्होंने स्क्रैमजेट इंजन व पुनरुपयोगी प्रमोचन यान की प्रौद्योगिकी प्रदर्शन उड़ान (आरएलवी-टीडी) के उड़ान परीक्षण का नेतृत्व किया। आरएलवी-टीडी के परियोजना निदेशक के रूप में नियंत्रण एवं निर्देशन तथा अभियान प्रबंधन रणनीतियां सहित आरएलवी-टीडी यान अभिकल्पना एवं उड़ान प्रदर्शन में उनका योगदान महत्वपूर्ण है। उन्होंने, मंगल कक्षित्र अभियान (एमओएम) के लिए पीएसएलवी का उपयोग करते हुए एक अल्प लागत रणनीति को रूप दिया। इसके अलावा, वे 6 डी प्रपथ अनुकरण सोफ्टवेयर, ‘सितारा’ के प्राथमिक विकासकर्ता हैं, जिसे इसरो के प्रमोचन यानों की अभियान योजना के लिए प्रयुक्त किया जाता है। वे प्रमोचन यानों के लिए प्रमोचन के दिन की पवन बायसिंग रणनीति का के प्राथमिक विकासकर्ता भी वे हैं, जिसके कारण सभी मौसम में प्रमोचन संभव हुआ। उन्होंने, पीएसएलवी के लिए ऊपरी चरण (पीएस4) पुनरारंभ क्षमता को कार्यान्वित किया, जो एक ही अभियान में विभिन्न कक्षाओं में विभिन्न प्रदायभारों के अंतःक्षेपण के द्वारा अभियान की बहुमुखता में सुधार लाती है। इसरो के सभी प्रमोचन यानों के निष्पादन तथा विश्वसनीयता को बढाने में उन्होंने महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

इसरो के प्रमोचन यान कार्यक्रम के लिए उन्होंने अभियान संश्लेषण एवं अनुकरण सुविधा, समांतर कंप्यूटिंग सुविधा एवं अतिध्वनिक पवन सुरंग सुविधा स्थापित की हैं। इसके अतिरिक्त उन्होंने प्रमोचन यान व सामाजिक अनुप्रयोग, दोनों के लिए कई प्रौद्योगिकी विकास की पहल को बल प्रदान किया है।

इसरो के प्रमोचन यान कार्यक्रम के लिए लिथियम-आयन सेल, विद्युत नोदन तथा उन्नत एविओनिकी हेतु प्रौद्योगिकी विकास कार्यक्रमों का उन्होंने प्रारंभ किया। प्रमोचन यानों तथा उपग्रहों में लिथियम-आयन सेल तथा विद्युत नोदन को शामिल किया गया। समाजिक उपयोग के लिए उद्योग के माध्यम से लिथियम-आयन सेलों के वाणिज्यकरण हेतु भी उन्होंने गतिविधियां शुरू की हैं ।

बहुविधात्मक अभिकल्पना ज्ञान आधार पर विचार करते हुए, मुख्य क्षेत्रों में चिकित्सीय युक्तियों के विकास हेतु उन्होंने चर्चा की शुरुआत की। उन्नत माइक्रो प्रोससर नियंत्रित कृत्रिम अवयव तथा लेफ्ट वेन्ट्रिकल असिस्ट डिवाइस नामक कृत्रिम हृदय पंप के विकास हेतु प्रोटो-टाइप विकास तथा फील्ड ट्रायलों के लिए उद्योगों के साथ मिलकर कार्य किये जा रहे हैं।

अंतरिक्ष परिवहन प्रणाली अभिकल्पना एवं प्राप्ति के सभी क्षेत्रों में सीधे प्राप्त अनुभवों के आधार पर नवंबर 2015 में स्प्रिंगर द्वारा प्रकाशित “इन्टिग्रेटड डिज़ाइन फोर स्पेस ट्रान्स्पोर्टेशन सिस्टम” नामक एक अनुपम पुस्तक का प्रकाशन किया. जो समग्र एकीकृत अभिकल्पना पहलुओं, विविध प्रणालियों के बीच की अन्योन्यक्रियाओं तथा विविध प्रमोचन यान प्रणालियों की अंतर-आश्रितताओं पर प्रकाश डालती है। छात्रों तथा इस क्षेत्र मे कार्यरत्तों द्वारा इस पुस्तक की को बड़ी स्वीकृति प्राप्त हुई है।

अपने सेवाकाल के दौरान उन्होंने अनेक पुरस्कार प्राप्त किए, जिनमें मार्च 2017 में डॉ. एमजीआर विश्वविद्यालय, चेन्नै से प्राप्त विज्ञान वाचस्पति (होनोरिस कोसा), मार्च 2017 में आइआइटी मुंबई से प्राप्त उत्कृष्ट पूर्व-छात्र पुरस्कार 2017 वर्ष 2016 की उत्कृष्ट उपलब्धि का इसरो पुरस्कार, अप्रैल 2014 में सत्यभामा विश्वविद्यालय, चेन्नै से विज्ञान वाचस्पति (होनोरिस कोसा), एमआइटी एलुम्नी एसोसिएशन, चेन्नै से उत्कृष्ट पूर्व-छात्र पुरस्कार 2013, वर्ष 2011 का डॉ. बिरेन रोय अंतरिक्ष विज्ञान पुरस्कार, वर्ष 2007 का इसरो योग्यता पुरस्कार तथा वर्ष 1999 का श्री हरि ओम आश्रम प्रेरित डॉ. विक्रम साराभाई अनुसंधान पुरस्कार शामिल हैं।

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