हमारे निदेशक

Director श्री एस सोमनाथ“विशिष्ट वैज्ञानिक” श्रेणी के अधिकारी हैं तथा वर्तमान में इसरो के सभी प्रमोचन यान कार्यक्रमों के लिए उत्तरदायी अग्रणी केंद्र विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र (वीएसएससी), तिरुवनंतपुरम के निदेशक हैं। जून, 2015 तक वे विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र (वीएसएससी) के सह-निदेशक (परियोजनाएं) थे तथा जीएसएलवी मार्क-।।। प्रमोचन यान के परियोजना निदेशक भी थे। परियोजना निदेशक के रूप में उनके नेतृत्व में, एलवीएम3-एक्स/केयर अभियान की प्रथम प्रयोगात्मक उड़ान 18 दिसंबर, 2014 को सफलतापूर्वक पूरी की गई।

उन्होंने वर्ष 1985 में इसरो में कार्यभार ग्रहण किया एवं पीएसएलवी के प्रारंभिक विकास चरण तथा पीएसएलवी की प्रथम उड़ान और सफल द्वितीय उड़ान पीएसएलवी-डी2 के दौरान उसके समाकलन की टीम का नेतृत्व किया था। परियोजना प्रबंधक के रूप में उन्होंने यंत्रावलियों, पाइरो-तकनीक प्रणालियों तथा उपग्रह प्रमोचन सेवा प्रबंधन के क्षेत्रों को संभाला। वाणिज्यिक लघु उपग्रहों के प्रथम प्रमोचन की अवधारणा उन्होंने की और उसे कार्यान्वित किया और छोटे उपग्रह आरोहण तथा पृथक्करण प्रणालियों का विकास किया जिसने कई वाणिज्यिक उपग्रहों को सफलतापूर्वक प्रस्तरित किया है।

उन्होंने वर्ष 2003 के दौरान जीएसएलवी मार्क।।। परियोजना में कार्यभार ग्रहण किया और उस यान की समग्र अभिकल्पना, अभियान अभिकल्पना, संरचनात्मक अभिकल्पना तथा समाकलन के लिए उत्तरदायी उप परियोजना निदेशक थे। जून 2010 से वे जीएसएलवी मार्क-।।। के परियोजना निदेशक बन गए।

नवंबर, 2014 तक वे वीएसएससी के ‘संरचनाएं’ एन्टिटि के उप निदेशक रहे तथा वीएसएससी के ‘नोदन एवं अंतरिक्ष ऑर्डनेंस एन्टिटि’ के उप निदेशक भी रहे।

जुलाई, 2015 में निदेशक, एलपीएससी के रूप में कार्यभार ग्रहण करने के बाद, एलपीएससी द्वारा साकार किए गए द्रव चरणों के साथ जीएसएलवी के चार सफल अभियानों तथा पीएसएलवी के ग्यारह सफल अभियानों के लिए भारतीय निम्नतापीय चरणों को साकार करने हेतु उन्होंने एलपीएससी की टीम का नेतृत्व किया। एलपीएससी से आपूर्ति की गई नोदन प्रणालियों का उपयोग करते हुए पंद्रह सफल उपग्रह भी प्रमोचित किए गए। 20 टन प्रणोद तथा सी25 चरण से युक्त सीई20 निम्नतापीय इंजन का विकास पूरा किया गया और जीएसएलवी मार्क-।।। डी1 की सफल उड़ान पूरी की गई। भविष्य के प्रमोचन यानों के लिए 200 टन अर्ध-निम्नतापीय इंजन, चंद्रयान-2 के लैंडर यान के लिए उपरोधनीय इंजनों तथा भविष्य के सभी विद्युत नोदन उपग्रहों के लिए उच्च प्रणोद विद्युत नोदन प्रणालियों का वे नेतृत्व कर रहे हैं।

श्री सोमनाथ प्रमोचन यानों की प्रणाली इंजीनियरी के क्षेत्र में विशेषज्ञ हैं। उन्होंने पीएसएलवी तथा जीएसएलवी मार्क।।। की समग्र वास्तुविद्या, नोदन प्रणालियों, संरचनात्मक एवं संरचनात्मक गतिकी, पृथक्करण प्रणालियों, यान समाकलन एवं समाकलन प्रक्रियाओं के विकास में योगदान दिया है।

श्री सोमनाथ ने टीकेएम इंजीनियरी कॉलेज, कोल्लम, केरल विश्वविद्यालय से विश्वविद्यालय के द्वितीय रैंक के साथ यांत्रिक इंजीनियरी में बी.टेक तथा भारतीय विज्ञान संस्थान, बैंगलूर से स्वर्ण पदक के साथ संरचनाएं, गतिकी तथा नियंत्रण में विशेषज्ञता के साथ वांतरिक्ष इंजीनियरी में स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त की।

प्रणाली इंजीनियरी तथा प्रमोचन यानों की अभिकल्पना में उनके उत्कृष्ट योगदानों के लिए सत्यभामा इन्स्टिट्यूट ऑफ सायन्स एन्ड टेकनॉलजी ने जुलाई 2018 में उन्हें विज्ञान वाचस्पति (हॉनोरिस कौसा) की उपाधि प्रदान की। इसरो से उन्होंने‘योग्यता पुरस्कार’ तथा ‘निष्पादन उत्कृष्टता पुरस्कार’ तथा जीएसएलवी मार्क-।।। के विकास के लिए ‘टीम उत्कृष्टता पुरस्कार’ प्राप्त किए। वर्ष 2018 में उन्होंने शिवपार्वती सांस्कृतिक समिति द्वारा संस्थापित “जनसेवा पुरस्कार 2018”, मार्थोमा कॉलेज ऑफ सायन्स एन्ड टेकनॉलजी द्वारा संस्थापित “मार्थोमा शैक्षणिक तकनीकी प्रशिक्षण एवं अनुसंधान केंद्र पुरस्कार 2018”, टीकेएम कॉलेज ट्रस्ट, कोल्लम द्वारा संस्थापित “जीवनकालीन उपलब्धि पुरस्कार” तथा आइआइएससी, बैंगलूर के वांतरिक्ष विभाग से “प्लैटिनम जयंती पुरस्कार” प्राप्त किए। उन्होंने एस्ट्रोनॉटिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया से अंतरिक्ष स्वर्ण पदक तथा अपने मास्टर्स कार्यक्रम के लिए आइआइएससी, बैंगलूर से स्वर्ण पदक प्राप्त किए।

वे इंडियन नेशनल अकादमी ऑफ इंजीनियरिंग (आइएनएई), एयरोनॉटिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया (एईएसआइ), एस्ट्रोनॉटिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया (एएसआइ) के अधि सदस्य तथा इन्टरनेशनल अकादमी ऑफ एस्ट्रोनॉटिक्स (आइएए) के तत्समान सदस्य हैं।

श्री सोमनाथ ने भारत के प्रतिनिधि के रूप में वियन्ना में यूएन-कोपस, पैरिस में एस्ट्रोनॉटिकल फेडरेशन (आइएएफ) की अंतर्राष्ट्रीय कार्यक्रम समिति व स्प्रिंग की बैठक, हैदराबाद में अंतर्राष्ट्रीय एस्ट्रोनॉटिकल कांग्रेस की हैदराबाद (2007), प्राग(2013), जेरुसलेम (2015), मेक्सिको (2016) तथा एडिलेड (2017) में आयोजित कार्यक्रम में भाग लेने के लिए कई यात्राएं कीं। वे अंतरिक्ष परिवहन की तकनीकी समिति तथा आइएएफ की अंतर्राष्ट्रीय परियोजना/कार्यक्रम प्रबंधन समिति के भी सदस्य हैं।

उन्होंने संरचनात्मक गतिकी एवं नियंत्रण, पृथक्करण यंत्रावलियों के गतिक विश्लेषण, कंपन एवं ध्वानिक परीक्षण, प्रमोचन यान अभिकल्पना तथा प्रमोचन सेवा प्रबंधन के क्षेत्र में पत्रिकाओं तथा संगोष्ठियों में लेख प्रकाशित किए हैं।