अंतरिक्ष कैप्सूल पुनःप्राप्ति प्रयोग

 

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अंतरिक्ष कैप्सूल पुनःप्राप्ति प्रयोगएक उल्लेखनीय उपलब्धि थी, जिसमें इसरो ने एक कक्षागत संवाहिका को सुरक्षित रूप से पृथ्वी पर वापस लाने और उसे पुनःप्राप्त करने की राष्ट्र की क्षमता का सफल प्रदर्शन किया। 555 कि.ग्रा. भारवाले एसआरई-1 का प्रमोचन 10जनवरी, 2007 को मुख्य प्रदायभार कार्टोसैट-2 तथा दो अन्य विदेशी उपग्रहों, लपान टबसैट तथा नानो-फायिनसैट-1, के साथ पीएसएलवी-सी7 द्वारा किया गया था। गोल-शंकु-प्रदीप्त आकार के एसआरई-1 को तीन अक्ष के स्थायीकृत सूर्य अभिलक्ष्यन विधा पर कक्षा में रखा गया। दो सूक्ष्म गुरुत्व प्रयोग: आइसीओ क्रिस्टल वृद्धि Ga-Mg-Zn मिश्रधातु, (भारतीय विज्ञान संस्थान तथा वीएसएससी द्वारा) और हाइड्रोक्सी आप्टाइट का जैव अनुहारी पदार्थ संश्लेषण (राष्ट्रीय धातुविज्ञानीय प्रयोगशाला, जमशेदपुर), को करने का मंच प्रदान करते हुए 12 दिनों तक वह ध्रुवीय सूर्य तुल्यकाली कक्षा में रहा। ये दोनों प्रयोग 11 तथा 14 जनवरी के बीच के तीन दिनों में पूरे किए गए।

12 दिनों तक कक्षा में रहने के बाद, 22जनवरी, 2007 को, जब संवाहिका मेक्सिको के तट से दूर प्रशांत महासागर के ऊपर था, संवृत पाश निर्देशन के अधीन पुनःप्रवेश हेतु एसआरई-1 को डी-बूस्ट किया गया। डी-बूस्ट कौशल के शुरू होने के 900 से. पहले, भू-स्टेशन से प्राप्त समयबद्ध आदेश के आधार पर, संवाहिका को पुनरभिविन्यास के अधीन किया गया। डी-बूस्ट चरण 559 से. तक चलता रहा। एसआरई-1 Mach 30 पर 7.9 कि.मी./से. की गति प्राप्त कर रहा था जब उसका पुनःप्रवेश भारत उप महाद्वीप के ऊपर 100 कि.मी. की ऊंचाई पर भारत के वायुमंडल में हुआ।

कार्बन फिनोलिक नासा टोपी, शंकु प्रदीप्त क्षेत्र के पुनरुपयोगी सिलिका टाइलों तथा प्रदीप्त अग्र पर निम्न सघनता अपक्षरकों से युक्त ऊष्मीय रक्षण प्रणाली ने पुनःप्रवेश से जुड़े 7000K की श्रेणी के उच्च तापमान से आंतरिक पैकेजों का रक्षण किया। जलावतरण के समय 12 मी./से. तक संवाहिका का मंदन एक तीन चरणोंवाली पैराशूट प्रणाली का प्रयोग कर प्राप्त किया गया। एसआरई-1 09 47 बजे श्रीहरिकोटा के तट से 140 कि.मी. की दूरी पर बंगाल की खाड़ी में जलावतरित हुआ।

डोमियर वायुयान का प्रयोग करके संवाहिका की पुनःप्राप्ति की गई और तटरक्षकों के जहाज़ ‘सारंग’ मेंइसका वहन कर मुख्य भूमि पर लाया गया। पुनःप्राप्त संवाहिका को वीएसएससी के अंतरिक्ष संग्रहालय में प्रदर्शित किया गया है।

 

अंतरिक्ष कैप्सूल पुनःप्राप्ति प्रयोगएक उल्लेखनीय उपलब्धि थी, जिसमें इसरो ने एक कक्षागत संवाहिका को सुरक्षित रूप से पृथ्वी पर वापस लाने और उसे पुनःप्राप्त करने की राष्ट्र की क्षमता का सफल प्रदर्शन किया। 555 कि.ग्रा. भारवाले एसआरई-1 का प्रमोचन 10जनवरी, 2007 को मुख्य प्रदायभार कार्टोसैट-2 तथा दो अन्य विदेशी उपग्रहों, लपान टबसैट तथा नानो-फायिनसैट-1, के साथ पीएसएलवी-सी7 द्वारा किया गया था। गोल-शंकु-प्रदीप्त आकार के एसआरई-1 को तीन अक्ष के स्थायीकृत सूर्य अभिलक्ष्यन विधा पर कक्षा में रखा गया। दो सूक्ष्म गुरुत्व प्रयोग: आइसीओ क्रिस्टल वृद्धि Ga-Mg-Zn मिश्रधातु, (भारतीय विज्ञान संस्थान तथा वीएसएससी द्वारा) और हाइड्रोक्सी आप्टाइट का जैव अनुहारी पदार्थ संश्लेषण (राष्ट्रीय धातुविज्ञानीय प्रयोगशाला, जमशेदपुर), को करने का मंच प्रदान करते हुए 12 दिनों तक वह ध्रुवीय सूर्य तुल्यकाली कक्षा में रहा। ये दोनों प्रयोग 11 तथा 14 जनवरी के बीच के तीन दिनों में पूरे किए गए।