आदित्य-1 अभियान

'आदित्य-1', प्रभामंडल नामक सूर्य के बाह्यतम क्षेत्र के अध्ययन के उद्देश्यार्थ प्रथम भारतीय अंतरिक्ष आधारित सौर कोरोनाग्राफ का प्रस्ताव है। सौर प्रभामंडल का तापमान दशलक्ष डिग्रियों के आगे जाता है। मुख्यतः उज्ज्वल सौर पटल और भूमि के वायुमंडल द्वारा सूर्य प्रकाश बिखेर दिए जाने के कारण भूमि से इस प्रभामंडल को केवल सूर्य-ग्रहण के दौरान ही देखा जा सकता है। सौर पटल को आच्छादित करने तथा प्रभामंडल का अध्ययन करने के लिए भूमि के वायुमंडल के आगे जाना ही पड़ता है।

‘आदित्य-1’ अभियान का मुख्य वैज्ञानिक लक्ष्य है सौर प्रभामंडल को तप्त करनेवाली, सौर पवन को त्वरित करनेवाली और प्रभामंडलीय द्रव्यमान उत्क्षेपण (सीएमई) उत्पन्न करनेवाली भौतिक प्रक्रियाओं को समझना।.

1.05 R से 3.0 R तक के प्रभामंडल दृश्य से युक्त 20 से.मी. कोरोनाग्राफ एक अक्षेतर परवलयिक दर्पण का उपयोग करता है। प्रदायभार में सांतत्यक/ब्रोडबैंड के लिए 6374 A, 5303 A और 5800 A में एक साथ बिंबन की क्षमता से युक्त तीन सीसीडी संसूचक प्रणाली होगी।

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आदित्य-1, चित्रकार की कल्पना में