मंगल कक्षित्र अभियान

मंगल कक्षित्र अभियान (एमओएम), 372 कि.मी. x 80000 कि.मी. की दीर्घवृत्ताकार कक्षा में मंगल का भ्रमण करने हेतु अभिकल्पित कक्षित्र यान सहित मंगल ग्रह के लिए इसरो का प्रथम अंतराग्रहीय अभियान है। क्रांतिक अभियान प्रचालनों तथा नोदन, संचार तथा अंतरिक्षयान की अन्य बस प्रणालियों की सख्त आवश्यकताओं पर विचार करते हुए, एमओएम को एक चुनौतीपूर्ण प्रौद्योगिकीय व वैज्ञानिक अभियान माना जाता है। भू-बद्ध युक्ति चाल (ईबीएम), मंगल ग्रहीय अंतरण प्रपथ (एमटीटी) और मंगल कक्षा अंतःक्षेपण (एमओआइ) चरणों के निष्पादन की क्षमता के साथ इस अंतरिक्षयान की प्राप्ति की गई है। करीब 400 दशलक्ष कि.मी. की दूरी पर संचार का प्रबंधन निश्चय ही चुनौतीपूर्ण था। इससे संबंधित गहन अंतरिक्ष अभियान योजना और स्वायत त्रुटि संसूचन तथा पुनःप्राप्ति भी इस अभियान में महत्वपूर्ण थे। 

अभियान की रूपरेखा

एसडीएससी, शार के भारतीय अंतरिक्ष पत्तन से नवंबर 5, 2013 को पीएसएलवी सी25 द्वारा 1337 कि.ग्रा.के अंतरिक्षयान का वहन किया गया। मंगल ग्रह में इसरो के प्रथम अंतराग्रहीय अभियान की शुरूआत अंकित करते हुए इस अंतरिक्षयान को 17.864 डिग्री की आनति पर 250 x 23000 कि.मी. की निर्धारित कक्षा में हूबहू अंतःक्षेपित किया गया।

पृथ्वी से मंगल तक कम-से-कम ऊर्जा स्थानांतरण का अवसर 26 महीनों में एक बार होता है। वर्ष 2013 के अवसर पर 2.592 कि.मी./से. के संचयी वृद्ध्यात्मक वेग की आवश्यकता पड़ी।

mars-orbiter

    इसरो की अंतरिक्ष विज्ञानों की सलाहकार समिति (एडकॉस) की सिफारिशों के अनुसार निम्नलिखित पांच प्रदायभारों को शामिल किया गया था।

 

       प्रदायभार

                             प्राथमिक लक्ष्य

लिमान आल्फा प्रकाशमापी (एलएपी

ड्यूटेरियम/हाइड्रोजन के माध्यम से मंगल ऊपरी वायुमंडल की पलायन प्रक्रियाएं

मंगल हेतु मिथेन संवेदक (एमएसएम)

मिथेन की उपस्थिति का पता लगाना

मंगल ग्रही बाह्यमंडलीय सम्मिश्र अनवेषक (मेनका)

मंगल ग्रह के ऊपरी वायुमंडल की निष्प्रभावी संरचना का अध्ययन

मंगल वर्ण कैमरा (एमसीसी)

 प्रकाशिकी प्रतिबिंबन

टीआइआर प्रतिबिंबन स्पेक्ट्रममापी (टीआइएस)

Map सतह संरचना तथा खनिज विज्ञान का मानचित्रण

 

मंगल ग्रही बाह्यमंडलीय तटस्थ सम्मिश्र विश्लेषित्र का परिवर्णी शब्द मेनका. मंगल कक्षित्र अभियान के पांच वैज्ञानिक प्रदायभारों मॆं से एक है, जो एसपीएल, वीएसएससी द्वारा प्रदत्त योगदान है। मेनका, त्रिज्य दूरी व समय के फलन के रूप में मंगल के बाह्य मंडल की सरचना तथा वितरण के यथास्थित अध्ययन करता है। 10 महीने की यात्रा के बाद सितंबर 2014 को मंगल कक्षित्र अंतरिक्षयान मंगल पर पहुंच गया। यह उच्च सौर गतिविधि की अवधि रही जब मंगल का बाह्य मंडल अधिक विस्तृत होने की प्रतीक्षा की जाती थी। इसप्रकार एमओएम के कक्षीय अवसर व समय सीमा मंगल के ऊपरी वायुमंडल-बाह्य मंडल के अन्वेषण में काफी अनुकूल हैं।
The deployed views of the spacecraft indicating वैज्ञानिक प्रदायभारों को सूचित करते हुए अंतरिक्षयान के विस्तरित विचार नीचे दिखाए गए हैं।

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