भूतुल्यकाली उपग्रह प्रमोचन यान

GSLV भूतुल्यकाली उपग्रह प्रमोचन यान (जीएसएलवी) संचार उपग्रहों की इनसैट तथा जीसैट श्रृंखलाओं जैसे 2 टन श्रेणी के उपग्रहों को भूतुल्यकाली अंतरण कक्षा (जीटीओ) में स्थापित करने में सक्षम है। जीएसएलवी एक 49 मी. लंबा, तीन चरणों का यान है, जिसका उत्थापन द्रव्यमान 416 टन है। प्रथम चरण में, 40 टन भारवाले चार द्रव स्ट्रैप-ऑन मोटरों से युक्त एस139 ठोस बूस्टर शामिल है। द्वितीय चरण (जीएस2) एक 37.5 टन द्रव नोदक का वहन करनेवाला द्रव इंजन है। तृतीय चरण देश में ही विकसित निम्नतापी ऊपरी चरण (सीयूएस) है जो विशेषतः 15 टन निम्नतापीय नोदकों (ईंधन के रूप में द्रव हाइड्रोजन (एलएच2) और ऑक्सीकारक के रूप में द्रव ऑक्सीजन (एलओएक्स)) का उपयोग करता है।

निम्नतापीय ऊपरि चरण


Cryo Stage pic for GSLV webpageनिम्नतापीय ऊपरी चरण उस महत्वपूर्ण प्रौद्य़ोगिकी को कार्यान्वित करता है जो कि प्रदायभार क्षमता को बढ़ाकर यान को संचार उपग्रहों के प्रमोचन के लिए अनुरूप बनाता है। अंतरिक्ष में पहुंच रखनेवाले देशों में इस प्रौद्योगिकी, जो अपेक्षित विशेष पदार्थों, मिश्रधातुओं तथा संविरचन प्रक्रिया की दृष्टि से चुनौतीपूर्ण है, के विकास तथा परीक्षण करनेवाला भारत का छठा देश है। प्रज्वलन के परीक्षण व इंजन के प्रचालन हेतु स्थापित सुविधाएं भी समान रूप से चुनौतीपूर्ण हैं, विशेषकर निर्वात स्थितियों के अधीन। वर्ष 2014 में 5जनवरी को श्रीहरिकोटा से 1982 कि.ग्रा. भारवाले जीसैट-14 उपग्रह को सुनिश्चित भूतुल्यकाली अंतरण कक्षा में स्थापित करते हुए देश में ही विकसित निम्नतापी चरण (सीयूएस-05) के साथ जीएसएलवी की पांचवीं विकासात्मक उड़ान की शानदार सफलता देखी गई।