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एलवीएम3

LVM3 भूतुल्यकाली उपग्रह प्रमोचन यान मार्क III (जीएसएलवी मार्कIII), जो एलवीएम3 के नाम से भी जाना जाता है, 4 टन श्रेणी के संचार उपग्रहों को भूतुल्यकाली अंतरण कक्षाओं (जीटीओ) में प्रमोचित करने में आत्मनिर्भरता प्राप्त करने हेतु इसरो द्वारा विकसित किया जा रहा अगली पीढ़ी का प्रमोचक है। प्रदायभारों को अन्य कक्षाओं में भी प्रमोचित करने हेतु एक बहुमुखी प्रमोचक के रूप में इस प्रमोचक की अभिकल्पना की गई है तथा निम्न-भू-कक्षाओं (एलईओ) के लिए उसकी प्रदायभार क्षमता 10 टन से अधिक होगी। एक बार जीएसएलवी-मार्क IIIके प्रचालनात्मक होने पर भारत 4 टन श्रेणी के संचार उपग्रहों के लिए प्राप्त प्रमोचन करने हेतु सक्षम होगा।

संरूपण

एलवीएम3 की अभिकल्पना 43.4 मी. लंबे, तीन चरणों से युक्त यान के रूप में की गई है, जिसका उत्थापन द्रव्यमान 640 टन है। समान रूप से बड़े दो ठोस बूस्टर, जिसमें प्रत्येक 200 टन ठोस नोदक से युक्त है, उत्थापन हेतु प्रारंभिक प्रणोद प्रदान करते हैं। इस कार्यक्रम के लिए विकसित 200 टन ठोस बूस्टर (एस200) विश्व के सबसे बड़े ठोस बूस्टरों में से एक है। ठोस बूस्टरों को क्रोड़ द्रव चरण (एल110) के साथ स्ट्रैप-ऑन किया गया है, जो द्वि-इंजन संरूपण में 110 टन द्रव नोदक का वहन करता है। विकासाधीन स्वदेशी निम्नतापी ऊपरी चरण (सी25) तृतीय चरण बनेगा और वह 27 टन निम्नतापी नोदकों का वहन करेगा। बड़े प्रदायभारों को समाहित करने के लिए प्रदायभार आवरण का व्यास 5मी. होगा। एलवीएम3 की प्रथम प्रयोगात्मक उड़ान केयर प्रदायभार का वहन कर 18दिसंबर, 2014 को श्रीहरिकोटा से उत्थापित हुई और उड़ान के वायुमंडलीय चरण का सफल परीक्षण किया। एलवीएम3-एक्स का बाह्य संरूपण जातीय यान के समान था और उसमें पूरी तरह कार्य करनेवाले एस200 व एल110 चरण थे। गैर-ज्वालित क्रायो इंजन से युक्त निम्नतापी ऊपरी चरण इस उड़ान में निष्क्रिय था।

 

योजनाबद्ध प्रमोचन

  • • पूरी तरह से कार्य करनेवाले निम्नतापी चरण से युक्त एलवीएम3 की विकासात्मक उड़ान वर्ष 2016-17 के लिए निर्धारित है।
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