ध्रुवीय उपग्रह प्रमोचन यान

PSLV ध्रुवीय उपग्रह प्रमोचन यान(पीएसएलवी) ने स्वयं को विविध अभियानों के लिए सर्वतोमुखी यान साबित किया है और अब वह इसरो का कमाऊ पूत है। यह, प्रमोचनात्मक स्थिति प्राप्त करनेवाला प्रथम प्रमोचक था।

पीएसएलवी राष्ट्रीय अपेक्षाओं तथा अंतर्राष्ट्रीय उपभोक्ताओं की प्रमोचन संबंधी अपेक्षाओं को पूरा कर रहा है। पीएसएलवी की लगातार सफलताओं की लंबी श्रृंखला तथा एक-साथ अनेक उपग्रहों का प्रमोचन करने की क्षमता ने उसे वैश्विक बाज़ार में एक विश्वसनीय, सर्वतोमुखी और कम खर्चवाले प्रमोचक के रूप में मज़बूती से खड़ा कर दिया है। कई वर्षों के लगातार प्रौद्योगिक सुधारों ने पीएलएलवी की प्रदायभार क्षमता को 600 कि.मी. सूर्य तुल्यकाली ध्रुवीय कक्षा (एसएसपीओ) में 1700 कि.ग्रा. तक और 284 कि.मी.×20650 कि.मी. की उप भू-तुल्यकाली अंतरण कक्षा में 1425 कि.ग्रा. तक बढ़ाया है। भारत के प्रथम चंद्र अभियान चंद्रयान-1 व भारत के प्रथम मंगल कक्षित्र अभियान (मंगलयान) को कक्षा में पहुंचाने के लिए पीएसएलवी का उपयोग किया गया था, इन तथ्यों ने इसकी विश्वसनीयता एवं सर्वतोमुखता को और प्रमाणित किया है।

संरूपण

295 टन उत्थापन द्रव्यमान से युक्त 44 मी. लंबा पीएसएलवी, एकांतर में ठोस व द्रव नोदन चरणों वाले एक चार-चरणी के यान के रूप में संरूपित है। प्रथम चरण 139 टन ठोस नोदक का वहन करता है, जिसे अधिक भारी प्रदायभारों के लिए साधारणतया छः 9 टन या 12 टन ठोस नोदक स्ट्रैप-ऑन मोटरों से संवर्धित किया जाता है। द्वितीय चरण, स्वदेशी विकसित विकास इंजन का उपयोग करता है, जो 40 टन द्रव नोदक का वहन करता है। तृतीय चरण एक सम्मिश्र मोटर आवरण से आच्छादित 7 टन का ठोस मोटर है जबकि चौथा चरण 2 टन द्रव नोदक का वहन करने वाले जुड़ुवे-इंजन संरूपण से युक्त एक द्रव चरण है। उपग्रह को एक प्रदायभार अनुकूलक मॉड्यूल में रखा जाता है और वायुमंडलीय आरोहण चरण के दौरान 3.2 मी. व्यास के एक ऊष्मा कवच द्वारा रक्षित होता है।

यान के विविध रूप एवं प्रमोचन क्षमता

पीएसएलवी-जेनेरिक
  • • ठोस स्ट्रैप-ऑनों की सं. : छः (9टी)
  • • एसएसपीओ में प्रदायभार क्षमता (600 कि.मी.) : 1550 कि.ग्रा.
पीएसएलवी कोर मात्र
  • • ठोस स्ट्रैप-ऑनों की सं. : शून्य
  • • एसएसपीओ में प्रदायभार क्षमता (600 कि.मी.) : 1100 कि.ग्रा.
पीएसएलवी एक्सएल
  • • ठोस स्ट्रैप-ऑनों की सं. : छः (12टी)
  • • एसएसपीओ में प्रदायभार क्षमता (600 कि.मी.) : 1700 कि.ग्रा.
  • • उप जीटीओ में प्रदायभार क्षमता (284 x 20650 कि.मी.) : 1425 कि.ग्रा.