1. अनुसंधान के बारे में
  2. अनुसंधान क्षेत्र
  3. दिशा-निर्देश

प्रायोजित अनुसंधान (रेस्पोंड)

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने एक कार्यक्रम को रूप दिया है, जिसके द्वारा भारत में शिक्षा के क्षेत्र में अंतरिक्ष विज्ञान, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी तथा अंतरिक्ष अनुप्रयोग से संबंधित अनुसंधान व विकास गतिविधियों को चलाने हेतु वित्तीय समर्थन प्रदान किया जाता है। रेस्पोंड इसरो द्वारा प्रायोजित अनुसंधान कार्यक्रम को सूचित करता है। रेस्पोंड कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य इसरो कार्यक्रमों के समर्थन हेतु गुणतापूर्ण अनुसंधान और विकासात्मक परियोजनाओं को चलाने के लिए शैक्षणिक संस्थाओं के साथ संपर्क स्थापित करना तथा इसप्रकार के अनुसंधान तथा विकास गतिविधियों से उपयोगी आउटपुट व्युत्पन्न करना है। रेस्पोंड कार्यक्रम, शैक्षिक आधार में वृद्धि करना, अंतरिक्ष कार्यक्रम के समर्थन हेतु शैक्षणिक संस्थाओं में गुणतापूर्ण मानव संसाधनों व अवसंरचना के निर्माण पर लक्ष्य करता है। विशेष मामलों में, इस कार्यक्रम से शैक्षणिकेतर आर एवं डी प्रयोगशालाओं द्वारा प्रस्तावित अनुसंधान एवं विकास परियोजनाओं को भी समर्थन दिया जाता है।

इनके अलावा, इसरो ने अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी तथा अनुप्रयोगों के क्षेत्रों में अनुसंधान गतिविधियां चलाने हेतु मुंबई, खरगपुर तथा मद्रास के भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आइआइटी); भारतीय विज्ञान संस्थान (आइआइएससी), बैंगलूर में अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी कक्षों (एसटीसी) और पुणे विश्वविद्यालय (यूओपी) के साथ संयुक्त अनुसंधान कार्यक्रम (जेआरपी) स्थापित किए हैं। ये एसटीसीयां व जेआरपी, संबंधित संस्था के निदेशक/कुलपति की अध्यक्षता में तथा सदस्यों के रूप में इसरो/अं.वि. एवं संबंधित संस्था के वरिष्ठ वैज्ञानिक/इंजीनियर की संयुक्त नीति समितियों (जेपीसी) द्वारा गाइड की जाती हैं। एसटीसी के अधीन संस्थान के संकाय द्वारा परियोजनाएं ली जाती हैं।

रेस्पोंड, इसरो के अंतरिक्ष कार्यक्रमों में रुचि बढ़ाने के लिए शैक्षणिक संस्थानों में इसरो के लिए महत्वपूर्ण सम्मेलनों, परिसंवादों, संगोष्ठियों और शैक्षणिक गतिविधियों का भी समर्थन करता है।

 

 

(अधिक ब्यौरों के लिए: www.csre.iitb.ac.in/isro_cell; www.iitk.ac.in/dord/isro; www.kcstc.iitkgp.ernet.in; www.unipune.ac.in/isro देखें। ).

रेस्पोंड @ वीएसएससी

 

इसरो के आदेश के आधार पर, वीएसएससी भी प्रायोजित अनुसंधान कार्यक्रमों का प्रस्ताव देता है। प्रमोचन यानों के विकास से संबंधित गतिविधियों, जिनमें सभी इंजीनियरी विधाओं को एक मैट्रिक्स प्रकार की अंतःक्रिया में एकसाथ लाया जाता है, की अनुपम प्रकृति के कारण बहु विधाओं में अनुसंधान का अवसर वीएसएससी प्रदान करता है।

 


वांतरिक्ष अभियांत्रिकी :

उड़ान गतिकी, कक्षीययांत्रिकी, पवन सुरंग अध्ययन, सीएफडी, प्रवाह क्षेत्र विश्लेषण, वायूष्मीय अभियांत्रिकी,आदि। 

प्रमोचन यान संरचनाएं:

संरचनात्मक विश्लेषण प्रतिरूपण तथा अनुकरण स्थिरता विश्लेषण, संरचनात्मक गतिकी एवं परीक्षण, मधु-छत्ताकार संरचनाएं, प्रयोगात्मक यांत्रिकी, आदि

Sअंतरिक्ष पदार्थ एवं प्रक्रमण

लघु मिश्र-धातुएं, अति मिश्र-धातुएं, परिशुद्धता संविरचन तकनीक, ऊष्मोपचार, सतह उपचार, वैल्डिंग प्रौद्योगिकी, पाउडर धातुकर्म, ढलाई प्रौद्योगिकी, सिरेमिकी, पदार्थ अभिलक्षणीकरण, आदि

सम्मिश्र पदार्थ:

सम्मिश्र पदार्थ प्रक्रमण एवं नियंत्रण, अभिलक्षणीकरण एवं परीक्षण, एनडीटी, प्रमोचन यानों के लिए सम्मिश्र संरचना का विकास तथा अंतरिक्षयान कार्बन-कार्बन सम्मिश्र, आदि।

नोदक, बहुलक, रासायनिक एवं अंतरिक्ष ऑर्डनेंस:

नोदक प्रक्रमण, अभिलक्षणीकरण, परीक्षण, ऊष्मीय रक्षण पदार्थ, आसंजक सिरेमिकी/मैट्रिक्स उत्पाद, ऊष्मीय पेइन्ट, पॉलिमाइड, एविओनिकी बैटरियां, ईंधन सेल, अंतरिक्ष आयुध पदार्थ, अभिलक्षणीकरण, टोंटी अभिकल्पना, उन्नत नोदन प्रौद्योगिकी, सीएफडी, ऊष्मा स्थानांतरण, निष्पादन अनुकरण, आदि।

एविओनिकी, निर्देशन एवं नियंत्रण:

संवेदक एवं यंत्रीकरण, पावर इलेक्ट्रॉनिकी डेटा अर्जन, संकेत प्रक्रमण, प्रौद्योगिकी एएसआइसी/एफपीजीए, युगपत् जड़त्वीय प्रणालियां, सर्वो यंत्रावलियां, निर्देशन एवं नियंत्रण, प्रपथ अनुकरण एवं विश्लेषण, आदि।

अंतरिक्ष विज्ञान

आयनमंडल, चुंबकमंडल, मौसमविज्ञानकी भौतिकी, वायुमंडलीय अध्ययन, ऐरोसोल, परिसीमा स्तर भौतिकी, जलवायु विज्ञान, ग्रहीय एवं अंतराग्रहीय अंतरिक्ष भौतिकी, आदि।

ब्यौरों के लिए यहां क्लिक करें

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कौन आवेदन दे सकते हैं?

• वैज्ञानिक, अभियंता, अनुसंधानकर्ता, मान्यता-प्राप्त शैक्षणिक संस्थाओं, विश्वविद्यालयों तथा अनुसंधान संगठनों के अध्यापन कर्मचारी सदस्य, व्यक्तिगत या समूहों के रूप में प्रस्ताव प्रस्तुत कर सकते हैं। किसी मान्यता-प्राप्त संस्थान से न जुड़े हुए व्यक्तियों के आवेदन प्रस्तावों पर विचार नहीं किया जाएगा।

• प्रस्तावक संबन्धित संस्था के पूर्णकालीन कर्मचारी होने चाहिए।

प्रस्ताव के साथ अपेक्षित सूचना

• कार्य के लक्ष्यों तथा वैज्ञानिक अनुप्रयोग योग्यताओं सहित प्रस्तावित अनुसंधान का संक्षिप्त विवरण।

• प्रस्तावित जांच के लिए प्रयुक्त की जानेवाली विधि या तकनीक का वर्णन।

• संभाव्य सबसे कम समय के भीतर आवश्यक आर्थिक समर्थन की व्याप्ति।

• आवेदन अग्रेषित करनेवाले संस्था के प्रधान जांचकर्ता का नाम। उसी परियोजना पर कार्य करनेवाले अन्य संस्थाओं के सह-जांचकर्ता भी हो सकते हैं। एक सह-जांचकर्ता को इसरो भी निर्धारित करेगा। तथापि, किसी परियोजना की संतोषजनक पूर्ति प्रधान जांचकर्ता तथा उनके संस्था का दायित्व रहेगा।

• सभी जांचकर्ताओं के जीवन-वृत्त।

• सभी निधि की ज़िम्मेदारी लेने अथवा उठाने वाले अन्य अभिकरणों के प्रस्ताव से संबन्धित अनुसंधान परियोजनाओं की सूची।

आवेदन कैसे दें?

• प्रस्ताव अपने-अपने संस्थाओं के माध्यम से विधिवत् अग्रेषित किए जाने चाहिए।

• संलग्न प्रारूपों में उस दस्तावेज़ की पांच प्रतियां तैयार की जानी चाहिए।

फॉर्म-ए Word Doc Icon
फॉर्म-बी Word Doc Icon
फॉर्म-सी Word Doc Icon

 

• अनुमोदन तथा आगे के प्रक्रमण हेतु आवेदन ‘रेस्पोंड समन्वयक, वीएसएससी, तिरुवनंतपुरम 695022’ को संबोधित करना चाहिए।

प्रक्रमण प्रक्रियाएं

प्रस्ताव के मूल्यांकन हेतु वीएसएससी के पास एक सुसज्जित प्रणाली है। अनुसंधान के क्षेत्र से संबंधित प्रायोजित अनुसंधान समन्वयन एवं समीक्षा टीम (एसआरसीआरटी) तकनीकी विषय-वस्तु, वीएसएससी से संबद्धता, प्रधान जांचकर्ता (पीआइ) की विशेषज्ञता, संस्थान में उपस्थित सुविधाएं, परियोजना की अवधि, बजट के पहलू,आदि की दृष्टि से मूल्यांकन करती है। पीआइ को सुझाव/प्रतिपुष्टि दिये जाते हैं। वीएसएससी की प्रतिपुष्टि के आधार पर पीआइ को प्रस्ताव का संशोधन करना है तथा अंतिम प्रस्ताव को निदेशक, वीएसएससी द्वारा गठित केंद्र-स्तरीय रेस्पोंड नियंत्रण टीम (आरएसटी) द्वारा आगे की समीक्षा की सिफारिश दी जाती है। ये समितियां इन प्रस्तावों के मूल्यांकन में अनुप्रयुक्त उन्मुखता के साथ समूह मनीषा प्रदान करती हैं और अपनी सिफारिशों को अनुमोदनार्थ निदेशक, वीएसएससी को प्रस्तुत करती हैं। अनुमोदित प्रस्तावों को, अध्यक्ष, इसरो द्वारा अंतिम अनुमोदन के लिए, इसरो मुख्यालय में अग्रेषित किया जाता है। अनुमोदन प्राप्त होने पर संस्थान को निधि प्रदान की जाती है तथा परियोजना प्रारंभ की जाती है। प्रगति के आधार पर इन चालू परियोजनाओं के प्रबोधन तथा वार्षिक नवीकरण किए जाते हैं। परियोजना की पूर्ति पर, परियोजना की समाप्ति हेतु, लेखापरीक्षा रिपोर्टों के साथ पीआइ अंतिम परियोजना रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे,ऐसी आशा की जाती है।

वीएसएससी ने केंद्र के सभी इकाइयों, इसरो मुख्यालय तथा प्रतिभागी संस्थानों के साथ सभी प्रकार के संपर्क हेतु एक रेस्पोंड समन्वयक को भी निर्धारित किया है।

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