परिदृश्य

अंतरिक्ष विज्ञान तथा अनुसंधान भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम का अभिन्न अंग है। भूमध्यरेखीय इलेक्ट्रोजेट प्राचलों के मापन के लिए तुंबा भूमध्यरेखीय रॉकेट प्रमोचन स्टेशन (टर्ल्स) से परिज्ञापी रॉकेटों के प्रमोचन के साथ वर्ष 1963 में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान की गतिविधियां शुरू की गईं। तब से लेकर, अद्यतन भू-आधारित प्रयोगात्मक सुविधाओं की स्थापना और ऊपरी वायुमंडलीय परिघटना, कॉस्मिक किरणों, ऊर्जित एक्स-किरणों तथा गामा किरणों पर बड़ी संख्या में रॉकेट एवं गुब्बारे वाहित परीक्षणों के साथ अंतरिक्ष विज्ञान कार्यक्रम ने प्रगति की है।

उपग्रह युग की शुरुआत के साथ ही, ऊपरी वायुमंडल/आयनोस्फियर की जांच करने, एक्स-रे तथा पराबैंगनी तरंगदैर्घ्यों में प्रेक्षण करने के लिए प्रदायभारों का प्रमोचन किया गया, जो कि पृथ्वी से संभव नहीं होता है। प्रथम भारतीय उपग्रह आर्यभट्ट ने 2 से 20 keVतक के माध्यमिक ऊर्जा सीमा-रेखा और 20 से 150 keVतक के कठिन ऊर्जा सीमा-रेखा में एक्स-रे दूरबीनों से युक्त एक प्रदायभार का वहन किया। भास्कर-Iउपग्रह पर एक एक्स-रे स्काई मानीटर कैमरा रखा गया था।

चंद्रमा पर भारत का पहला अभियान चंद्रयान-1, जिसने भारत के ग्रहीय अन्वेषण कार्यक्रम की शुरुआत की, के सफल प्रमोचन से देश में अंतरिक्ष विज्ञान अनुसंधान को प्रेरणा प्राप्त हुई है।

वीएसएससी के तत्वावधान में अंतरिक्ष भौतिकी प्रयोगशाला (एसपीएल) पृथ्वी के निम्नतर तथा ऊपरी वायुमंडलों, आयनमंडलों और चुंबकमंडलों तथा अद्यतन प्रयोगों के समूह का प्रयोग कर अन्य सौर प्रणाली पिंडों (ग्रह, ग्रहीय उपग्रह तथा धूमकेतुएं), भू-आधारित, जहाज़ तथा वायुयानों, गुब्बारे और रॉकेट वाहित व उपग्रह प्रदायभारों पर आधारभूत एवं अनुप्रयुक्त अनुसंधान करती है। यहाँ पर मुख्य विधाएं हैं ऐरोसॉल तथा मौसम प्रणोदन, सीमा स्तर प्रक्रियाएं, संख्यात्मक प्रतिरुपण, ट्रेस गैस और वायुमंडलीय रसायनविज्ञान, सूक्ष्म तरंग संचरण तथा पृथ्वी की सतह व वायुमंडल का सुदूर संवेदन, मध्य वायुमंडल की गतिकी तथा ऊर्जिकी, संवहन एवं मेघ, चुंबकमंडल से संपर्क के साथ मध्यमंडल – निम्न तापमंडल – आयनमंडल में संसाधन तथा युग्मन, भूमध्यरेखीय वायविकी, आयनमंडल व चुंबकमंडल की जांच, चांद तथा मंगल के बहिर्मंड़ल के प्रयोगात्मक अन्वेषण, सूर्य की प्रक्रियाओं की जांच, सौर पवन-ग्रह अन्योन्य क्रियाएं तथा प्रतिरूपण एवं ग्रहीय व धूमकेतु संबंधी उत्सर्जनों का प्रेक्षण। एसपीएल इसरो की विभिन्न योजनाओं के अधीन उपर्युक्त अग्रणी विधाओं में अनुसंधान करने हेतु अभिप्रेरित छात्रों व वैज्ञानिकों के लिए अवसर भी प्रदान करती है।